ग़लत उद्धरणविचार सही, शब्द बदले उच्च
संपादक ने जाँचा · 8 अक्टू 2026

सुन त्ज़ु के नाम पर

अपने शत्रु को जानो और ख़ुद को जानो, तो तुम सौ लड़ाइयाँ जीतोगे।

पूरी तरह नहीं। पाठ सौ लड़ाइयों में ख़तरा न होने का वादा करता है, सौ जीतों का नहीं।

स्रोत की पंक्ति

知彼知己,百战不殆

zhī bǐ zhī jǐ, bǎi zhàn bù dài

If you know the enemy and know yourself, you need not fear the result of a hundred battles. If you know yourself but not the enemy, for every victory gained you will also suffer a defeat. If you know neither the enemy nor yourself, you will succumb in every battle.

The Art of War · III. Attack by Stratagem · §18 · tr. Lionel Giles, 1910

व्याख्या

पूरी तरह नहीं। विचार सुन त्ज़ु का है, और प्रचलित शब्द अध्याय III, खंड 18 का ग़लत उद्धरण हैं। चीनी पाठ है 知彼知己,百战不殆। शब्दशः: दूसरे को जानो, ख़ुद को जानो, सौ लड़ाइयाँ, कोई ख़तरा नहीं। अक्षर 殆 का अर्थ संकट है। इसका अर्थ हार नहीं है, और जीत भी नहीं। पंक्ति में कुछ भी यह वादा नहीं करता कि तुम सौ लड़ाइयाँ जीतोगे। वादा सुरक्षा का है, जीतों के बेदाग़ रिकॉर्ड का नहीं।

जाइल्स यह सावधानी बनाए रखते हैं, और फिर वह सबक़ पूरा करते हैं जिसे छोटी पंक्ति छोड़ देती है। अगर तुम शत्रु को और ख़ुद को जानते हो, तो सौ लड़ाइयों के परिणाम से डरने की ज़रूरत नहीं। अगर तुम ख़ुद को जानते हो पर शत्रु को नहीं, तो हर जीत के साथ एक हार भी झेलोगे। अगर तुम न शत्रु को जानते हो न ख़ुद को, तो हर लड़ाई में हारोगे। पूरे III.18 का हवाला दें। “सौ जीत” कभी वाक्य था ही नहीं, और दोनों विफलताएँ भी बात का हिस्सा हैं।

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संदर्भ

विश्वास: उच्च। उद्धृत संस्करण में एक ठीक अंश है, या कोई नामित स्रोत उत्पत्ति दर्ज करता है। विश्वास कैसे काम करता है

ग्रंथ में

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